मातृ शिशु बाल पोषण कोर्स हिंदी में | IIT बॉम्बे | प्रो. रूपल दलाल | कुपोषण प्रबंधन
Course Details
| Exam Registration | 83 |
|---|---|
| Course Status | Ongoing |
| Course Type | Elective |
| Language | English |
| Duration | 12 weeks |
| Categories | Biological Sciences & Bioengineering |
| Credit Points | 3 |
| Level | Undergraduate/Postgraduate |
| Start Date | 19 Jan 2026 |
| End Date | 10 Apr 2026 |
| Enrollment Ends | 02 Feb 2026 |
| Exam Registration Ends | 20 Feb 2026 |
| Exam Date | 24 Apr 2026 IST |
| NCrF Level | 4.5 — 8.0 |
भारत में कुपोषण की चुनौती और एक समाधान: IIT बॉम्बे का विशेष पाठ्यक्रम
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, भारत में 36% शिशु नाटेपन (स्टंटिंग) और 32% शिशु कम वजन (अंडरवेट) के शिकार हैं। यह समस्या सिर्फ गरीबी तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों, यहाँ तक कि संपन्न परिवारों में भी देखी जा रही है। कुपोषण और साथ ही बढ़ता मोटापा, हमारे देश के बच्चों के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है। इन चुनौतियों से निपटने की कुंजी है ‘पहले 1000 दिन’ – यानी गर्भाधान से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की अवधि, जब शारीरिक और मस्तिष्क का विकास सबसे तेजी से होता है।
इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे एक विशेष 12-सप्ताह का निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम लेकर आया है: ‘मातृ, शिशु, बाल, युवा पोषण (Maternal Infant Young Child Nutrition - MIYCN)’। यह कोर्स हिंदी में है और कुपोषण की रोकथाम के लिए एक व्यावहारिक, कौशल-आधारित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
पाठ्यक्रम के बारे में: क्या सीखेंगे?
यह पाठ्यक्रम माताओं और छोटे बच्चों की समग्र देखभाल पर केंद्रित है। इसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल पर भी जोर दिया गया है।
मुख्य विषय-क्षेत्र:
- पोषण का मूल विज्ञान: पोषक तत्वों और उनकी भूमिका की बुनियादी समझ।
- कुपोषण के प्रकार: नाटापन, कमजोरी, कम वजन और ‘छिपी हुई भूख’ (सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी)।
- पहले 1000 दिनों का महत्व: जीवनभर के स्वास्थ्य की नींव कैसे रखें।
- स्तनपान का विज्ञान एवं तकनीक: कोलोस्ट्रम का महत्व, क्रॉस-क्रेडल होल्ड सहित विभिन्न पकड़ के तरीके, स्तनपान आकलन, हाथ से दूध निकालना और संरक्षण।
- पूरक आहार (6 से 24 माह): सही समय, तरीका और व्यंजन। शाकाहारी व मांसाहारी पौष्टिक आहार बनाने की विधियाँ।
- किशोरावस्था, गर्भावस्था एवं स्तनपान कराने वाली माताओं का पोषण: तीनों चरणों में पोषण संबंधी आवश्यकताएँ।
- मानवमितीय मूल्यांकन: वृद्धि चार्ट (पर्सेंटाइल), जेड-स्कोर, वजन न बढ़ने के कारणों की पहचान।
- प्रशिक्षण एवं निगरानी कौशल: स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और समुदाय में निगरानी करने के तरीके।
यह पाठ्यक्रम किसके लिए है?
यह कोर्स एक विस्तृत श्रोताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है:
| श्रेणी | विशेष रूप से लाभान्वित होंगे |
|---|---|
| शैक्षणिक | स्नातक/स्नातकोत्तर छात्र (जीव विज्ञान, स्वास्थ्य, सामाजिक कार्य), विभिन्न IITs के छात्र |
| स्वास्थ्य सेवा पेशेवर | डॉक्टर, नर्स, आयुष चिकित्सक, स्तनपान परामर्शदाता, पोषण विशेषज्ञ |
| सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता | आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सेविका, एनजीओ कार्यकर्ता, फ्रंटलाइन कार्यकर्ता |
| सरकारी अधिकारी एवं प्रशासक | IAS/सिविल सेवा अधिकारी, स्वास्थ्य, WCD, आदिवासी कल्याण विभागों के कर्मचारी |
| समुदाय एवं परिवार | गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताएँ, उनके परिवारजन, महिला स्वयं सहायता समूह |
आवश्यक योग्यता: पाठ्यक्रम हिंदी में है, अतः हिंदी भाषा का ज्ञान आवश्यक है। किसी विशेष शैक्षणिक डिग्री की अनिवार्यता नहीं है।
पाठ्यक्रम संरचना (12 सप्ताह)
- सप्ताह 1: मातृ, शिशु, बाल, युवा पोषण – एक परिचय
- सप्ताह 2: पोषण का विज्ञान
- सप्ताह 3: कुपोषण के प्रकार और छिपी हुई भूख
- सप्ताह 4: पहले 1,000 दिनों का महत्व, कोलोस्ट्रम, स्तनपान
- सप्ताह 5: स्तनपान का विज्ञान
- सप्ताह 6: स्तनपान की क्रॉस-क्रेडल स्थिति और 45 परामर्श बिंदु
- सप्ताह 7: विभिन्न पकड़, स्तनपान आकलन, दूध निकालना व संरक्षण
- सप्ताह 8: प्रशिक्षण कैसे दें और क्षेत्र में निगरानी
- सप्ताह 9: पूरक आहार – I (6-24 माह), व्यंजन विधियाँ
- सप्ताह 10: पूरक आहार – II, समस्याएँ एवं समाधान, पौष्टिक नाश्ता
- सप्ताह 11: किशोरावस्था, गर्भावस्था पूर्व एवं गर्भावस्था का पोषण
- सप्ताह 12: वृद्धि मापन, जेड-स्कोर, पाठ्यक्रम की मुख्य बातें
प्रशिक्षक: प्रो. (डॉ.) रूपल दलाल
इस पाठ्यक्रम का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) रूपल दलाल (MD, FAAP, IBCLC) कर रही हैं, जो IIT बॉम्बे के सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी अल्टरनेटिव्स फॉर रूरल एरियाज (CTARA) में एक एसोसिएट प्रोफेसर (एडजंक्ट) हैं।
उनकी विशेषज्ञता:
- फाउंडेशन फॉर मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (FMCH) की संस्थापक चिकित्सा निदेशक।
- IIT बॉम्बे में हेल्थ स्पोकन ट्यूटोरियल की प्रोजेक्ट लीडर।
- भारत के शहरी झुग्गी-झोपड़ियों, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण रोकथाम पर 14 वर्षों का व्यावहारिक अनुभव।
डॉ. दलाल का गहन अनुभव यह सुनिश्चित करता है कि यह पाठ्यक्रम केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों और उनके समाधान पर केंद्रित रहेगा।
संदर्भ सामग्री एवं पुस्तकें
पाठ्यक्रम में भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP) के दिशा-निर्देश, शोध लेख और केस स्टडीज जैसी प्रामाणिक सामग्री शामिल है, जो सीखने की प्रक्रिया को और समृद्ध बनाती है।
क्यों जरूरी है यह पाठ्यक्रम?
यह पाठ्यक्रम सिर्फ जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का उपकरण है। यह उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को सशक्त बनाता है जो भारत के पोषण संकेतकों में सुधार लाना चाहते हैं। चाहे आप एक छात्र हों, एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हों, या एक जिम्मेदार नागरिक, यह कोर्स आपको वह ज्ञान और कौशल देगा जिससे आप अपने परिवार, समुदाय और देश के स्वास्थ्य में योगदान दे सकते हैं।
अपना पंजीकरण कराएं और कुपोषण के खिलाफ इस महत्वपूर्ण लड़ाई में एक प्रशिक्षित सहयोगी बनें।
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